(Water on Moon)NASA को चांद पर कैसे मिला पानी और अब आगे क्या, जानें सब

 NASA को चांद पर कैसे मिला पानी और अब आगे क्या, जाने
all you need to know about discovery of water on moon by nasa
इंसान अंतरिक्ष में जीवन की खोज में जुटा है। भले ही अभी तक हमें ब्रह्मांड में अपना साथी न मिला हो, हमारे सबसे करीबी पड़ोसी के पास उत्साहित करने वाली कोई चीज जरूर मिली है। अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASA के Stratospheric Observatory for Infrared Astronomy (SOFIA) ने पुष्टि की है कि पहली बार सूरज की रोशनी में चांद पर पानी की खोज की गई है। इस खोज के साथ ही इशारा मिला है कि चांद की सतह पर पानी सिर्फ ठंडी में नहीं, हर जगह मौजूद हो सकता है। यहां जानते हैं कि यह खोज क्यों अहम है और भविष्य में इससे क्या फायदा होगा।

​चांद पर क्या मिला?

SOFIA ने Clavius Crater पर पानी के मॉलिक्यूल की खोज की है। यह धरती से दिखने वाला सबसे बड़ा क्रेटर है जोदक्षिणी गोलार्ध पर है। इससे पहले चांद की सतह पर हाइड्रोजन का एक फॉर्म मिला है लेकिन वैज्ञानिक पानी और उसके जैसे हाइड्रॉक्सिल (OH) में फर्क नहीं कर पा रहे थे। यहां से मिले डेटा में पानी की मात्रा 100-412 पार्ट्स पर मिलियन मिला था। यह चांद की एक क्यूबिक मीटर मिट्टी में पानी की एक बोतल के 28 ग्राम के बराबर है। NASA हेडक्वॉर्टर्स के साइंस मिशन डायरेक्टोरेट के ऐस्ट्रोफिजिक्स डिविजन के डायरेक्टर पॉल हर्ट्ज ने कहा है, 'हमें संकेत मिले थे कि H2O, जैसा हमें पता है, वह चांद के सूरज से रोशन होने वाले हिस्से में है। अब हमें पता है कि यह वहां मौजूद है।

​कैसे की गई खोज?

SOFIA को जो नतीजे मिले हैं वह सालों की रिसर्च के आधार पर पाए गए हैं। 1969 में Apollo ऐस्ट्रोनॉट्स जब पहली बार चांद से वापस आए थे, तब माना जा रहा था कि यह पूरी तरह से सूखा है। NASA के Lunar Crater Observation and Sensing Satellite जैसे दूसरे ऑर्बिटल और इंपैक्टर मिशन की मदद से 20 साल में यह पाया गया कि चांद के ध्रुवों पर बर्फ है। वहीं, Cassini मिशन और Deep Impact comet mission के अलावा भारत की स्पेस एजेंसी ISRO (इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन) के चंद्रयान-1 मिशन और NASA के Infrared Telescope Facility की मदद से चांद की सतह को और बारीकी से देखा गया और सूरज की रोशनी पाने वाले हिस्से में पानी के संकेत मिले। हालांकि, यह नहीं पता लगाया जा सका था कि यह H20 था या 0H. SOFIA की मदद से चांद पर देखने का नया तरीका मिला है। इस मॉडिफाइड Boeing 747SP जेटलाइनर में 106 इंच के डायमीटर का टेलिस्कोप लगा है और यह 45,000 फीट की ऊंचाई पर है। धरती से उठने वाले 99% वाष्प (water vapor) से ऊपर उठकर यह इन्फ्रारेड ब्रह्मांड को और साफ-साफ देख सकता है। यह अपने Faint Object Infrared Camera for Sophia Telescope (FORECAST) की मदद से खास 6.1 माइक्रॉन की वेवलेंथ पर पानी के मॉलिक्यूल खोज सका। सूरज की रोशनी में Clavius Crater  पर हैरान कर देने वाली मात्रा में पानी मिला।

इस खोज से खड़े हुए ये सवाल

होनोलूलू के मनोओ की यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई के ग्रैजुएट थीसिस वर्क में स्टडी की लीड लेखक केसी हॉनिबॉल ने कहा है कि बिना वायुमंड के पानी को स्पेस में खो जाना चाहिए। हॉनिबॉल अब मैरीलैंड के ग्रीनवेल्ट के NASA के Goddard Space Fligt Center का कहना है कि कुछ तो है जिससे पानी बन रहा है और किसी चीज से पानी ट्रैप हो रहा है। यह एक बड़ा सवाल है कि ऐसा कैसे हो रहा है। माइक्रोमीटियराइट्स (micrometeorites) चांद की सतह पर गिरते रहते है। इनमें कुछ मात्रा में पानी होता है जो चांद की सतह पर जमा हो सकता है। एक और संभावना है कि सूरज से आने वाली हवा (Solar Wind) चांद की सतह पर हाइड्रोडन आती होगी। इससे ऐसे खनिजों के साथ केमिकल रिएक्शन होता है जिनमें ऑक्सिजन होती है। इस रिएक्शन से हाइड्रॉक्सिल (OH) पैदा होता है। वहीं, माइक्रोमीटियराइट्स के साथ होने वाले रेडिएशन से हाइड्रॉक्सिल पानी में बदलता है। सवाल यही नहीं है, यह भी है कि पानी यहां स्टोर कैसे होता है। हो सकता है कि यह मिट्टी में मोती जैसे ढांचों में फंसा हो जो माइक्रोमीटियराइट की टक्कर से बनते हैं। हो सकता है कि ये चांद की मिट्टी में छिपा हो।

​अब आगे क्या?

अब चांद के ऐसे दूसरे हिस्सों में पानी की खोज की जाएगी जहां पानी की मौजूदगी हो सकती है। पानी कैसे बनता है, स्टोर होता है और चांद में एक हिस्से से दूसरे हिस्से पर पहुंचता है, इन सब बातों को स्टडी किया जाएगा। यह डेटा आने वाले चांद के मिशन में मदद करेगा जिससे पहली बार चांद पर पानी का मैप बनाया जा सकेगा। इस खोज से चांद की सतह की हमारी समझ बढ़ी है और डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन के संसाधनों के बारे में और सवाल खड़े हुए हैं।' पानी डीप स्पेस में अहम संसाधन है और जीवन के लिए अहम जरूरत है। SOFIA को जो पानी मिला है उसका इस्तेमाल हो सकता है या नहीं, यह अभी नहीं पता है। NASA के Artemis प्रोग्राम में एजेंसी 




              By Akshit Dawas

 


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